सीमाओं पर अब ‘ड्रोन’ से दुश्मन पस्त! BSF ने शुरू किया देश का पहला ‘स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर’, 42 ‘ड्रोन वॉरियर्स’ का पहला बैच तैयार

  • BSF ने ड्रोन खतरों से निपटने के लिए ग्वालियर के पास टेकनपुर अकादमी में ड्रोन युद्ध स्कूल की स्थापना की है।
  • 42 अधिकारियों का पहला बैच ‘ड्रोन वॉरियर्स’ के रूप में ट्रेनिंग पूरी कर चुका है।
  • यह स्कूल अत्याधुनिक तकनीक जैसे सिम्युलेटर, जैमर और AI टूल्स से लैस है।
    (नई दिल्ली/टेकनपुर)
    देश की सीमाओं की सुरक्षा को और भी मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। BSF ने ड्रोन से होने वाले हवाई खतरों का मुकाबला करने और अपनी सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भारत के पहले ‘स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर’ को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास टेकनपुर में स्थित BSF अकादमी में इस अत्याधुनिक स्कूल की स्थापना की गई है। इस स्कूल से 42 अधिकारियों का पहला बैच ‘ड्रोन वॉरियर्स’ के रूप में सफलतापूर्वक अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चुका है, और जल्द ही इनकी तैनाती की जाएगी। ये अधिकारी अब BSF की विभिन्न यूनिटों में अन्य कर्मियों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
    अत्याधुनिक तकनीक से लैस है सेंटर
    यह पहल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों के बाद शुरू की गई है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ड्रोन तकनीक के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया था। BSF के महानिदेशक दलजीत चौधरी द्वारा 2 सितंबर को उद्घाटन किया गया यह स्कूल ड्रोन सिम्युलेटर, लाइव फ्लाइंग जोन, रात में ऑपरेशन करने की सुविधा, RF जैमर, काइनेटिक इंटरसेप्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक उपकरणों से लैस है।
    500 ड्रोन कमांडो तैयार करने का लक्ष्य
    इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए शुरुआती तौर पर 20 करोड़ रुपये का फंड मिला है और भविष्य में लगभग 500 ड्रोन कमांडो को प्रशिक्षित करने की योजना है। इस कदम से BSF को जटिल इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने, उन्हें जाम करने और मार गिराने में बड़ी ताकत मिलेगी। यह भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

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